
Activity
1. विद्यार्थी गौरैया द्वारा कपास प्राप्ति से टोपी बनवाने और राजा को सीख देने की प्रक्रिया के द्वारा रिले दौड़ की विधि को सिखाने में सक्षम होंगे
2. जैसे गौरैया ने एनेक बाधाओं से गुजरते हुए अपने ध्येय को प्राप्त किया ठीक वैसे ही विद्यार्थी भी जीवन की बाधाओं से गुजरते हुए अपने ध्येय को प्राप्त करने में सक्षम होंगे.
शारीरिक शिक्षा शिक्षक व विषय शिक्षक कम से कम 20-20 विद्यार्थियों को 5 दलों में बाँट कर यह गतिविधि करवा सकते हैं . इसके लिए 4-4 विद्यार्थियों के दल बना कर रिले दौड़ करवा सकते हैं और विद्यार्थियों को गौरैया के टोपी बनवाने के सफर को बताते हुए रिले दौड़ की बारीकियो को सिखा सकते हैं.
शिक्षकों को विद्यार्थियों की सुरक्षा व सरंक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए और मैदान में फर्स्ट एड का प्रबंध भी रखना चाहिए
रिले रेस की उत्पत्ति प्राचीन ग्रीस में हुई थी, जहां कई कुरियर के माध्यम से एक मेसेज स्टिक’ पास हुआ था।
आधुनिक समय में, रिले रेस एक ट्रैक एंड फील्ड (Track and Field) इवेंट है और ओलंपिक खेलों (Olympic Games) में ये एथलेटिक्स’ के अंदर आता है।
ओलंपिक और अन्य IAAF- द्वारा स्वीकृत टूर्नामेंट में से रिले रेस एक ऐसा इवेंट है जहां चार एथलीटों की एक टीम स्प्रिंट रेस में समान दूरी तय करती है, प्रत्येक रेसर एक रॉड जैसी वस्तु को अपनी रेस के बाद साथी को पास करता है, जिसको अगली रेस दौड़नी होती है। इस वस्तु को 'बैटन' कहा जाता है।
ओलंपिक में दो रिले दौड़ पुरुष और महिला के लिए होती हैं: 4x100 मीटर और 4x400 मीटर। रिले में अंतिम रनर को 'एंकर' कहा जाता है।
4x100 मीटर रिले एक ऐसा इवेंट है जिसमें चार सदस्यों की एक रिले टीम लेन में 100 मीटर की दूरी तय करती है।
प्रत्येक रनर को प्रत्येक रन के दौरान बैटन लेकर जाना होता है और टीम के अगले सदस्य को सौंपना होता है।
किसी भी सदस्य को हैंडओवर के दौरान बैटन छोड़ने या निर्धारित क्षेत्र के बाहर हैंडओवर करने पर उस टीम को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। आमतौर पर किसी भी टीम का आखिरी धावक टीम का सबसे तेज़ धावक होता है।
फील्ड ट्रैक , 20 बैटन , सीटी , चूना फील्ड मार्क करने के लिए
| Relevance Activity with sports | Relevance Activity with subject | Quality of Activity | Creativity | Expert Comment | Name | Action |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2 | 2 | 2 | 2 | Activity planned needs more clarity in terms of how it is to be conducted as per the learners-centric approach. variation can be more thought of and planned properly.LO's of the chapter can be more defined. | RASHMI SINGH | delete edit |